आतंकवाद से डरो नहीं, पढ़ो इस कविता को।
मौत से डरने पर आती है मौत,
खौंफ की साली-घरवाली है मौत
इसकी तो संघर्ष ही है सच्ची सौत
जिसके चूमने के ज़्यादा सुन्दर हैं होंठ।
मौत की कार्यवाही है अति भयानक
भावुक लोगों की तो आ जाती है शामत
आंसू चीख पुकार, मत ला और कयामत
और जो जुल्म किसी का देखे, किसीको सता मत।
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