जिनके लिए लड़े असंख्य वीर बलवान, लेकर हाथों में तलवार-गदा कंधों पर तीर-कमान, बदन पर ज़ख्म और प्रहार के कटे निशान, शत्रु को भयभीत करते नृशंस जवान, बयां करता हूं उन भारत राजा की शान।। स्वर जिनके थे रक्षते दुर्बलों के कान, शूद्र जिनके आज भी बांटते हैं धान, जिनके राज्य का सूर्य सदा चढ़े परवान, जिनके राज्य में होता है सर्वदेवों का सम्मान, बयां करता हूं उन भारत राजा की शान।। जिनके दर्शन करके सैनिक भूल जाएं अपनी थकान, जिनपर ऐसे गौर करें जैसे सामने स्वयं भगवान, दुर्बल को जो बनवाते थे बलशाली पहलवान, जिनको स्मरण करने से बन जाते हैं महान् , बयां करता हूं उन भारत राजा की शान।। जिनके नाम पर रखा गया भारत नाम, जिनके लिए साधारण से थे अति विशिष्ट काम, जिनके नेताओं को आते दुनिया भर से सलाम, जिनके राष्ट्र में राष्ट्रभक्ति सिर चढ़ करबोले आम, बयां करता हूं उन भारत राजा की शान।।