अस्लाह-ए-ब्रह्मोस-ए-तीर
जय भारतीय रक्षक वीर कर्तव्य राह पर बढ़ना धीर शत्रु पंडुब्बियां देना चीर फिर भोग लगेगी गुड़ की खीर। बृतानवी चले हैं विश्व युद्ध राह ज़ख़्म दूंगा इतने कि देंगे वे कराह राज पाठ सौंप कर लेंगे तंख्वाह रथ गाड़ियों को छोड़ चलेंगे लेकर यमाहा बनाओ और अस्लाह-ए-ब्रह्मोस-ए-तीर जो शत्रु ठिकानों को नस्तेनाबूत करेगा फिर जश्न नहीं मनाएंगे, दाल भात खाएंगे कोरोना के जंजाल बाद विश्व युद्ध जीत लाएंगे।