सेनाई महिलाओं के बोल
सिपाही मेरे सिपाही
मैं तेरी निश्छल माही
तू मजबूत तख्ता मैं पाक स्याही
सैन्य जीवन संघर्षों में शाही।
तेरी सूरत देख बीति बरसों
खेतों में लहलहाए सरसों
परिश्रम ईमान अनाज को भरसों
सब धन-जन फिर भी मैं तरसों।
जीवन जग में बने हम राहि
जीवन मृत्यु ईश्वर की चाहि
बहादुरी साहस विवेक की सलाहि
विजय रथ पर मोहे चढ़ाहि।
वीर तुम श्री हनुमान को ध्याना
जैसे रामजी के करत हैं कामा
तैसे शत्रु को धूल चटाना
तबहि बुलाते दिल्ली धामा।
आकर मोहे तुम संग कीजो
मोरी सुधि फुर्सत से लीजो
दर्शन ईश्वर प्रतिदिन दीजो
बाल गोपाल सहज ही बीजो।
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